कमी नहीं जॉब्स की

नए और लगातार समृद्ध होते क्षेत्रों में स्किल्ड लोगों की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आज नौकरियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन यह सिर्फ उनके लिए है, जो दक्ष और मल्टी टास्क हैं। अब प्रश्न यह है कि स्किल कैसे डेवलप करें, आइए जानते हैं..

भारत में जनसंख्या और बेरोजगारी का चोली-दामन का साथ है। वर्षो से यह कहा जाता रहा है कि नौकरियां नहीं हैं, भीषण बेरोजगारी है। यह बात आज भी काफी हद तक सही है.., लेकिन सिर्फ सरकारी नौकरियों के बारे में।

संभावना वाले क्षेत्र
पिछले कुछ वर्षो में कई ऐसे क्षेत्र सामने आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में कुशल लोगों की मांग बढ़ी है। हमारे देश में पारंपरिक शिक्षा का स्ट्रक्चर है, उसमें मांग के अनुपात में ऐसे कुशल लोगों की आपूर्ति नहीं के बराबर हो पा रही है। ऐसे क्षेत्रों में प्रमुख हैं : आईटी और इससे जुड़े तमाम क्षेत्र, फार्मेसी और फार्मास्युटिकल्स, काल सेंटर्स/बीपीओ,लॉ, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, एविएशन, मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल, वेब आदि), हॉस्पिटैलिटी, एनिमेशन, मल्टी मीडिया, कंप्यूटर एकाउंटेंट्स, टेलीकम्युनिकेशंस, बैंकिंग एवं इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग, फैशन डिजाइनिंग, ज्यूलरी व जेम डिजाइनिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और प्रोग्रामर, वेब डिजाइनर, हार्डवेयर एवं नेटवर्किग (चिप व कंपोनेंट लेवल), टूर एवं ट्रैवेल, सर्विस सेक्टर आदि। इस संबंध में दिल्ली स्थित एयर होस्टेस एकेडमी (एएचए) की संस्थापक और चीफ कंसल्टेंट सपना गुप्ता का कहना है कि, आज बड़ी राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास जॉब तो हैं, पर वे स्किल्ड लोगों को रखना चाहते हैं। वे ट्रेंड लोगों का रखना चाहते हैं। ..हमारा प्रयास एविएशन (एयर होस्टेस/ फ्लाइट स्टीवर्ट), ग्राउंड स्टाफ, नॉन-कैटरिंग (फ्रंट ऑफिस, टिकटिंग/ रिजर्वेशन)आदि के लिए ट्रेंड स्टाफ उपलब्ध कराना है।

बुलंदियां छूते युवा
आज मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र में कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से युवाओं को लाखों-करोड़ों के ऑफर मिल रहे हैं। इसमें आईआईएम यानी इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट के युवा शीर्ष पर हैं। अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल ने आईआईएम-बंगलौर को विश्व के सौ सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों में शुमार किया है। इस साल मल्टीनेशनल कंपनियां बड़ी संख्या में कैंपस इंटरव्यू के लिए इन संस्थानों में आई। उनमें से अधिकांश ने तो इन संस्थानों के भारतीय युवाओं को नब्बे लाख रुपये वार्षिक तक का ऑफर दिया है। ऐसे में युवा आईआईएम या आईआईटी की पढ़ाई के प्रति क्यों नहीं आकर्षित होंगे? इतना ही नहीं, सिटी बैंक, एबीएन-एमरो, डयूश, एचएसबीसी जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंकों में दक्ष भारतीय युवाओं को विशेषज्ञ के रूप में रखा जा रहा है, जैसे-जर्मनी के डयूश बैंक के ग्लोबल मार्केटिंग हेड अंशु जैन, सिटी बैंक की रिटेल बैंकिंग ब्रांच के प्रेसीडेंट अजय बंगा, भारत में एबीएन-एमरो के सीईओ रोमेश सोबती आदि। प्रमुख उद्योग संघ एसोचैम द्वारा हाल में जारी एक रिपोर्ट में इसके अध्यक्ष अनिल के. अग्रवाल ने कहा है कि फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में वर्ष 2010 तक दो हजार करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। ऐसे में इस क्षेत्र में करीब आठ लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

सॉफ्ट स्किल भी जरूरी
सवाल यह उठता है कि हिन्दी बेल्ट के युवा क्या करें? पढ़ाई में तो वे किसी से कम नहीं होते! गणित जैसे विषय में भी उनकी जबर्दस्त पकड़ होती है..। फिर क्या कारण है कि योग्यता और प्रतिभा होने के बावजूद उनमें से अधिकांश फिसड्डी रह जाते हैं। विश्लेषण करने पर यही लगता है कि वे अपनी मार्केटिंग सही ढंग से नहीं कर पाते यानी सब कुछ जानते हुए भी वे अपने को प्रभावी तरीके से प्रजेंट नहीं कर पाते, जिससे उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पाती। इस कमी को दूर कर वे भी मनचाही मंजिल पा सकते हैं..लेकिन इसके लिए अपनी कमियों का आकलन कर उन्हें दूर करना होगा।

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