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सरकार ने बिड़ला होम फाइनेंस कंपनी में जर्मनी की बीएमडब्ल्यू होल्डिंग एजी के 50 करोड़ के अतिरिक्त निवेश से पूरी इक्विटी खरीदने के प्रस्ताव सहित कुल 408 करोड़ 22 लाख रुपये के 42 विदेशी निवेश प्रस्तावों को आज अपनी मंजूरी दे दी।

वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की सिफारिश पर इन प्रस्तावों को मंजूरी दी। जर्मनी की बीएमडब्ल्यू निजी क्षेत्र की बिड़ला होम फाइनेंस का अधिग्रहण करने जा रही है।

जर्मन कंपनी इसमें अपनी इक्विटी वर्तमान 50 फीसदी से बढ़ाकर सौ फीसदी करने जा रही है। निवेश प्रस्तावों में डेनमार्क की मेयर्सक द्वारा मुंबई में बल्क टर्मिनल को फिर से विकसित करने का 317 करोड 80 लाख रुपए का प्रस्ताव भी शामिल है।

मॉरीशस की एक कंपनी का 20 करोड़ रुपए की लागत से मुंबई में डीलक्स पांच सितारा होटल खोलने को भी मंजूरी मिल गई। एचसीएल पेरोट सिस्टम्स लि 4.14 करोड़ रुपए की लागत से एक भारतीय कंपनी के शेयर खरीदेगी।

नाल्को की चार हजार करोड़ की विस्तार योजना

देश का सबसे बड़ा एल्यूमीनियम उत्पादक नाल्को अपनी बॉक्साइट खानों, एल्यूमिना रिफायनरी, एल्यूमिनियम स्मेल्टर और बिजली संयत्र में 4091.51 करोड़ रुपए की विस्तार योजना बना रहा है।

नाल्को के द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम नाल्को ने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इस योजना के लिए कंपनी रकम अपने आंतरिक स्रोतों और वाणिज्यिक ऋणों के जरिये जुटाएगी।

योजना को इस वर्ष फरवरी में सार्वजनिक निवेश बोर्ड ने मंजूरी दे दी थी। इससे नाल्को की वार्षिक उत्पादन क्षमता 4,80,0000 टन से बढक़र 6,30,0000 टन हो जाएगी।

एल्यूमीना रिफायनरी की उत्पादन क्षमता 15,75000 टन से बढक़र 21,00000 टन तथा एल्यूमीनियम स्मेल्टर की उत्पादन क्षमता 3,45,000 टन से बढ़ाकर 4,60,000 टन हो जाएगी। इसके अलावा, बिजली संयत्र की क्षमता 960 मेगावाट से बढक़र 1200 मेगावाट हो जाएगी।

ताज होटल कराएगा जंगलों की सैर

घने जंगलों की सैर करने की चाहत रखने वालों के लिए अच्छी खबर है। ताज होटल्स रिसॉट्र््स एंड पैलेसेस ने अफ्रीका की कंपनी कंजर्वेशन कॉर्पोरेशन अफ्रीका और चौधरी ग्रुप के साथ मिलकर देश के जंगलों की सैर और वहां के लजीज व्यंजन परोसने की योजना बनाई है।

कंपनी की रोमांच से भरे इस प्राकृतिक पर्यटन के लिए 30 करोड़ रुपए के शुरुआती निवेश की योजना है, जिसमे तीनों कंपनियां बराबर की भागीदार होंगी। ताज समूह के होटल चलाने वाली कंपनी इंडियन होटल्स के प्रबंध निदेशक रेमंड बिकसन ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन मे बताया कि अफ्रीकी कंपनी को प्राकृतिक पर्यटन का काफी अनुभव है, जिसकी मदद से देश के विभिन्न जंगलों में लॉज बनाए जाएंगे।

कंपनी शुरुआती निवेश 30 करोड़ रुपए कर रही है जिसे बाद में बढ़ाया जाएगा। कंपनी 20 से 25 कमरों वाले लॉज बनाएगी। राजस्थान में रणथंभोर और भरतपुर तथा मध्यप्रदेश में कान्हा और बांधवगढ को पहले चरण मे लिया जाएगा, लेकिन सैर का मजा फिलहाल अमीर लोग ही उठा सकेंगे क्योंकि एक रात रुकने का खर्च 300 से 350 डॉलर होगा।

इस पूरी योजना मे राज्य और केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कंपनी ने इसके संचालन के लिए एक सलाहकार परिषद बनाने का फैसला किया है, जिसमें सभी पक्षों के सदस्य होंगे और इसकी सलाह से ही काम होगा।

दाभोल पावर कंपनी पर कब्जा कर सकती हंै बंैंकें

यदि डिफॉल्ट्स जारी रहे तो तीन बिलियन डॉलर की दाभोल पावर कंपनी के भारतीय ऋणदाता डीपीसी कंपनी के फिजिकल असेट्स पर कब्जा करने में नहीं हिचकिचाएंगे, हालांकि उनका इरादा पावर प्लांट को चलाने का नहीं है। एक सीनियर बैंकर ने कहा कि हमारा काम पैसा उधार देना है, पावर प्लांट्स चलाना नहीं, लेकिन बिगड़ते हालातों में हम प्लांट पर कब्जा करने को मजबूर होंगे। भारतीय बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं का टोटल ए०सपोजर 6100 करोड़ रुपए का है- प्रोजे०ट के डेट कंपोनेंट का लगभग 70 फीसदी हिस्सा, यानी 70:30 का इ०िवटी रेशो।

वित्तीय संस्थाओं के सूत्रों ने बताया कि हमें चिंता करने की जरूरत नहीं ०योंकि हमारे ए०सपोजर के सि०योरिटी कवर का रेशो 100 फीसदी से ऊपर है। यदि डीपीसी नीचे जाती है तो भी हमारे पास पर्याप्त कवर मौजूद रहेगा। सि०योर्ड क्रैडिटर्स के तौर पर बैंक एवं वित्तीय संस्थानों का डीपीसी के असेट्स पर सबसे पहला अधिकार होगा। सूत्रों के मुताबिक एनरॉन कॉर्पोरेशन ने दिवालिया सूट फाइल कर दिया हो, लेकिन डीपीसी एक अलग इकाई है। हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले कोई हल निकाल लिया जाएगा। बैंक एवं वित्तीय संस्थान ब्याज दरों में किसी सीमा तक कटौती करने को तैयार नहीं हैं तथा प्रोजे०ट को बचाने के लिए ऋणों की मैच्योरिटी प्रोफाइल को री-शैड्यूल करने में भी उनकी रूचि है।

आईडीबीआई तथा एसबीआई ने पहले ब्याज दरों में कटौती की थी। आईडीबीआई ने ब्याज दर को 19 फीसदी से घटकार 16.5 फीसदी कर दिया था। एसबीआई ने इसे 17 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया था। वित्तीय संस्थानों की औसत ब्याज दर 14 फीसदी है। आईसीआईसीआई, आईडीबीआई, आईएफसीआई और एसबीआई ने पहले ही बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला दायर कर दिया है ताकि वे अपनी सि०योरिटीज को डीपीसी में सुरक्षित रख सकें और उन्हें बनाए रख सकें। वे चाहते हैं कि 2184 मैगावॉट पावर प्रोजे०ट के पहले चरण का काम तुरंत दोबारा शुरू हो। इस मामले में चार रिस्पॉन्डेंट्स हैं- डीपीसी, एमएसईबी, भारत सरकार तथा महाराष्टï्र सरकार।

विदेशी ऋणदाताओं में बैंक ऑफ अमेरिका, सिटी बैंक, क्रेडिट सूईस फस्र्ट बास्टन, जैपनीज बैंक ऑफ इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन ओर एएनजेड इन्वेस्टमेंट बैंक शामिल हैं। यदि दाभोल पावर कंपनी वर्ष 2001-02 की अंतिम दो तिमाहियों में ब्याज का भुगतान करने में असफल रहती है तो एसबीआई, आईसीआईसीआई और आईडीबीआई को सम्मिलित तौर पर अपनी वित्त वर्ष 2002 की बु०स में प्रोविजनिंग अकाउंट के रूप में 600 करोड़ रुपए का झटका लगेगा। इसके अलावा इन बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं को वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में 420 करोड़ रुपए की राशि का नुकसान इंट्रेस्ट इंकम के रूप में उठाना पड़ेगा।

एक सीनियर बैंकर के अनुसार चूंकि प्रोजे०ट का दूसरा चरण अभी भी लागू किया जा रहा है, बैंक और वित्तीय संस्थाएं तकनीकी रूप से स्टिकी असेट्स के लिए प्रोविजन न करके छूट सकती हैं, लेकिन प्रूडेंशियल नॉम्र्स के मुताबिक वे वर्ष के अंत में 10 फीसदी प्रोविजनिंग करने को तैयार हैं, यदि असेट स्टिकी हो जाते हैं। आरबीआई के नियमानुसार किसी असेट को सबस्टेंडर्ड घोषित करने के लिए लगातार दो ०वार्टर्स के लिए ब्याज के भुगतान न करने का डिफॉल्टर होना जरूरी है। 2300 करोड़ रुपए की अधिकतम राशि आईडीबीआई की, उसके बाद 1800-1800 करोड़ रुपए की राशि एसबीआई तथा आईसीआईसीआई की इस कंपनी में मौजूद है।

आईएफसीआई तथा कैनरा बैंक ने कर्ज के रूप में 6100 करोड़ रुपए की राशि दी है। डीपीसी ने 30 सितंबर, 2001 तक सभी ब्याज संबंधी भुगतान कर दिए हैं। चूंकि ब्याज की औसत दर 14 फीसदी के आसपास है, वित्तीय संस्थानों तथा बैंकों को कंपनी से हासिल होने वाली ब्याज की वार्षिक आय 840 करोड़ रुपए के बराबर है। यदि कंपनी अंितम दो तिमाहियों में ब्याज का भुगतान करने में असफल रही तो बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों को 420 करोड़ रुपए की ब्याज राशि का नुकसान उठाना पड़ेगा।

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